देशद्रोह कानून क्या है ? IPC की धारा 124A को समझिये !

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IPC 124A
देशद्रोह कानून क्या है ? IPC की धारा 124A को समझिये !

ये कानून आया कहाँ से।

देशद्रोह का कानून 1859 तक नहीं था। इस कानून को 1860 में बनाया गया और इसे 1870 में IPC में धारा 124A के नाम से शामिल कर लिया गया। देशद्रोह का कानून ब्रिटिश सरकार की देन है। आज़ादी के बाद भारत ने इसे ऐसे ही अपना लिया।

देशद्रोह क्या है?

IPC की धारा 124A में ऐसा क्या काम है जिसको करने से हम देशद्रोही कहलाते हैं। IPC की धारा 124A के अनुसार यदि कोई व्यक्ति सरकार के खिलाफ कुछ बोलता है या कुछ लिखता है या किसी लिखने बोलने वाले व्यक्ति का समर्थन करता है या अपने द्वारा लिखे हुए शब्दों से नफरत फैलाता है तो वह देशद्रोह का अपराधी है।

IPC की धारा 124A के अनुसार ये एक संज्ञेय और गैर जमानती अपराध है जिसमें आपको पुलिस बिना किसी वारंट के गिरफ्तार कर सकती है ये एक गैर ज़मानती अपराध है जिसमें केवल हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ही जमानत दे सकती है।

IPC की धारा 124A के अनुसार यदि कोई व्यक्ति देशद्रोह का अपराधी पाया जाता है तो उसे 3 साल का कैद और जुर्माना या फिर केवल जुर्माना या फिर उम्रकैद की सज़ा हो सकती है।

इस कानून का इस्तेमाल कहा कहा किया गया है।

इस कानून का इस्तेमाल सबसे पहले बाल गंगाधर तिलक पर ब्रिटिश सरकार ने किया था उसके बाद इस कानून का इस्तेमाल ब्रिटिस सरकार ने महात्मा गांधी के ऊपर किया था। ब्रिटिस सरकार ने इस कानून को अपने फायदे के लिए बनाया था, क्योंकि जो भी व्यक्ति ब्रिटिस सरकार के खिलाफ कुछ बोलेगा तो उस व्यक्ति को इस कानून के तहत जेल में कैद कर दिया जायेगा।

IPC की धारा 124A के तहत अगर आप भारत सरकार के खिलाफ बोलेंगे तो आप देशद्रोही कहलायेंगे। और आपको उम्रकैद की सज़ा हो सकती है। लेकिन संविधान हमें बोलने की आज़ादी देता है लेकिन ये कानून इस कानून को तोड़ता है। अगर कोई व्यक्ति राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करता है या संविधान का अपमान करता है तो उस पर देशद्रोह का कानून चलना चाहिए यहां तक ये कानून ठीक है। सरकार के खिलाफ बोलने और लिखने पर देशद्रोह का कानून चलना ठीक नहीं है। लेकिन देशद्रोह कानून में 90% मामले ऐसे ही होते हैं और वो फिर कोर्ट से जमानत पर छूट भी जाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट कहता है कि यदि कोई व्यक्ति सरकार के खिलाफ लिखता है तो जब तक उससे कोई हिंसा नहीं होती है या फिर कोई दंगा या समाजिक असंतोष नहीं फैलता है तब तक उसे दंड नहीं दिया जायेगा।

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