जब पुलिस आपकी FIR दर्ज करने से मना कर देती है तो आपको क्या करना चाहिए।

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जब पुलिस आपकी FIR दर्ज करने से मना कर देती है तो आपको क्या करना चाहिए।

हमारे साथ जब कोई क्राइम होता है या कोई ओफेंस होता है तो सबसे पहले हम पुलिस स्टेशन में FIR फाइल कराने जाते हैं लेकिन कई बार ऐसा होता है की पुलिस आपकी FIR लिखने से मना कर देती है। इस पोस्ट में हम आपको बताएँगे की पुलिस आपकी FIR लिखने से मना कर देती है तो आपको क्या करना चाहिए।

आपकी FIR लिखने से पुलिस क्यों मना कर देती है।

सबसे पहले हम जान लेते है की ओफेंस या क्राइम दो प्रकार के होते हैं-

1.संज्ञेय अपराध -: ये सीरियस क्राइम होता है और यह क्रिमिनल प्रोसिजर कोड सेक्शन 2C में दिया गया है। जिसके तहत डायरेक्ट रिपोर्ट दर्ज की जाती है और पुलिस को अरेस्ट वारंट की जरुरत नहीं होती है वह किसी को भी शक के आधार पर बिना किसी अरेस्ट वारंट के गिरफ्तार कर सकती है। ये सीरियस क्राइम होता है, जैसे की हत्या, रेप, इत्यादि। इस तरह के सीरियस मैटर में पुलिस को हाई ऑथोरिटी से परमिशन लेने की जरुरत नहीं होती है।

 

2.असंज्ञेय अपराध -: इस तरह के अपराध में क्रिमिनल प्रोसिजर कोड सेक्शन 2L के द्वारा डायरेक्ट रिपोर्ट दर्ज नहीं होती है और पुलिस किसी को भी बिना किसी अरेस्ट वारंट के गिरफ्तार नहीं कर सकती है। गिरफ्तार करने के लिये पुलिस को हाई ऑथोरिटी से परमिशन लेने की जरुरत पड़ती है। पुलिस को हाई ऑथोरिटी से एक वारंट लेना होता है। उसी के बाद पुलिस उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है। ये सीरियस क्राइम नहीं होता हैं, जैसे की किसी को परेशान करना, किसी साथ धोखा करना इत्यादि। जैसे ही पुलिस को किसी असंज्ञेय अपराध के बारे में पता चलता है तो पुलिस FIR फाइल नहीं करती है। जबकि पुलिस उस अपराध को जनरल डायरी में नोट कर लेती हैं और फिर वारंट लेकर उस व्यक्ति को गिरफ्तार करती हैं और फिर उस व्यक्ति को कोर्ट के सामने पेश करती हैं।

 

अगर आपके साथ जो ओफेंस हुआ हैं वह असंज्ञेय अपराध हैं तो आप उसके खिलाफ FIR दर्ज नहीं करा सकते हैं। केवल पुलिस आपकी कम्प्लेंन लेती है और उसको जनरल डायरी में नोट कर लेती हैं। उसके बाद पुलिस तहकीकात करती हैं और अरेस्ट वारंट लेने के बाद उस व्यक्ति को गिरतार करती हैं और उसे कोर्ट में पेश करती हैं।

 

पुलिस अगर FIR दर्ज नहीं करती हैं तो क्या करना चाहिए-

अगर आपके साथ जो ओफेंस हुआ हैं वह संज्ञेय अपराध हैं एक सीरियस मैटर है तो पुलिस की यह ड्यूटी बनती है की वह आपकी FIR दर्ज करे। FIR या तो आप अपने घर से लिखकर ले जा सकते हैं या फिर आप वहां पर बोलेंगे और पुलिस आपकी FIR लिखेगी। उसके बाद उसे ध्यान से पढ़ने के बाद आपको उस पर सिग्नेचर करना होता है उसके बाद आपको एक FIR की कॉपी दे दी जाती हैं , अब हम बात कर लेते हैं की पुलिस आपकी FIR दर्ज करने से मना कर देती हैं बिना किसी वैलिड कारण के तो आपको क्या करना चाहिए।

 

संज्ञये अपराध होने पर भी अगर पुलिस आपकी FIR दर्ज नहीं करती हैं तो आपको सीनियर ऑफिसर जैसे की  S.P. के पास जाना चाहिए और आपकी लिखकर कम्पलेंन करना चाहिए या फिर आप S.P. को पोस्ट के द्वारा भी अपने कम्पलेंन भेज सकते हैं।

 

अगर आप S.P. के पास भी कम्पलेंन की और आपकी FIR दर्ज नहीं हुई तो आपको CRPC यानि की क्रिमिनल प्रोसिजर कोड सेक्शन 156(3) के तहत आपको मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट की अदालत में शिकायत करनी चाहिए। मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट के पास ये पॉवर होता है की वह आपकी FIR दर्ज करने के लिये पुलिस को आर्डर दे सकता है। अगर आप मैजिस्ट्रेट को एक बार कम्पलेंन कर देते हैं तो निश्चित ही आपकी FIR दर्ज हो जाती हैं, ये भी हो सकता की मैजिस्ट्रेट आपकी FIR दर्ज करने के लिये पुलिस को आर्डर न देकर किसी पुलिस को इन्क्यारी करने का आर्डर देता है। उसके बाद मैजिस्ट्रेट को रिपोर्ट मिलने के बाद अगर मैजिस्ट्रेट को लगता है की आपके मामले में FIR दर्ज होनी चाहिए तो तब वह पुलिस को FIR दर्ज करने का आर्डर देता है। उसके बाद आपकी FIR दर्ज होती है और पुलिस तहकीकात शुरू कर देती है।

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