कोर्ट में गीता पर हाथ रख कर कसम क्यों खिलाया जाता है रामायण पर क्यों नहीं | ओथ एक्ट 1969

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गीता पर हाथ रख कर कसम क्यों खिलाया जाता है

गीता पर हाथ रख कर कसम क्यों खिलाया जाता है

गीता पर हाथ रख कर कसम क्यों खिलाया जाता है

भगवान राम ने कभी जो है की झूठ का सहारा नहीं लिया। वो मर्यादा पुरषोतम थे उनका जीवन एक आदर्श जीवन रहा जबकि कृष्ण में युद्ध में विजय के लिये किसी भी आदर्श का पालन नहीं किया जहाँ आवश्यकता थी वहां उन्होंने कूटनीति और झूठ का भी प्रयोग किया फिर क्या कारण है की कोर्ट में गीता पर हाथ रख कर कसम क्यों खिलाया जाता है रामायण पर नहीं।

भारत में गीता पर हाथ रख कर कसम लेने की जो परम्परा है ये कब शुरू होई थी

भारत में मुग़ल शासकों ने धार्मिक किताबों पर हाथ रख कर शपथ लेने की परम्परा शुरू की थी। उससे पहले ऐसा नहीं था, क्योकि मुग़ल शासक अपने लाभ के लिये कई बार झूठ का सहारा लेते थे छल कपट करते थे, इसलिये भारत के नागरिकों पर उनका विश्वाश नहीं था। वो ऐसा मानते थे की भारत के नागरिक अपने धर्म ग्रंथों पर हाथ रख कर शपथ लेंगें तो वह झूठ नहीं बोलेंगें। शायद उन्हें सत्य वचन के लिये भारत के गंगाजल परम्परा का ज्ञान रहा होगा।

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मुगलों और समकक्ष शासकों में गीता पर हाथ रख कर शपथ लेनें की दरबारी प्रथा थी। ऐसा इसलिये होगा क्योकि गीता जो है की वो एक ही है लेकिन रामायण जो है की वो कई है जैसा की देवदत पटनायक के कथनानुसार भारत में लगभग 300 तरह के रामायण प्रचलित है, तुलसीदास जी के द्वारा लिखा गया जो है वो रामचरितमानस हैं और वाल्मीकि जी ने जो लिखा है वो रामायण है। इसमें ये एक कारण हो सकता है की 300 तरह के रामायण में से किसकी शपथ दिलाई जाये।

मुगलों के शासनकाल में गीता पर हाथ रख कर शपथ लेने की एक दरबारी प्रथा था ये एक कानून नहीं था। अंग्रेजों ने इसे एक क़ानूनी रूप दे दिया। इंडियन ओथ एक्ट एक कानून है 1873 का इसे पास किया गया और इसे सभी अदालतों में लागु कर दिया गया। इस एक्ट के अंतर्गत हिन्दू सम्प्रदाय के लोग गीता पर और मुस्लिम सम्प्रदाय के लोग कुरान पर हाथ रख कर शपथ लेते थे। इसाई धर्म के लोग बाइबिल पर हाथ रख कर शपथ लेते थे। अन्य धर्म के लोग जो है वो अपने धर्म के पवित्र किताब जो भी वो मानते हों उसपर हाथ रख कर उन्हें शपथ दिलाया जाता था।

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1969 में जाकर यह प्रथा समाप्त हो गयी, मतलब वर्तमान समय में कोई भी किताब की कसम नहीं खिलाई जाती है। अगर आपने फिल्मों में देखा हो की एक आदमी किताब लेकर आता है और बोलता है की आप इस किताब पर हाथ रख कर कसम खाइए की आप जो भी कहेंगें वो सच कहेंगें और सच के शिवा कुछ नहीं कहेंगें  ये सब अब ख़त्म हो गया है।

1969 में एक नया ओथ एक्ट 1969 पास किया गया और ये पास किया गया लॉ कमीशन की 28 रिपोर्ट के आधार पर लॉ कमीशन ने अपनी 28वीं में 1873 के ओथ एक्ट में सुधार के सुझाव दिए थे और जिनको अपनाकर के नया कानून पारित किया गया।

अब भारत में किस चीज़ की शपथ दिलायी जाती है

नये कानून के पास होने के बाद भारत में शपथ लेने की प्रथा के स्वरूप में बदलाव किया गया है। अब शपथ सिर्फ सर्व शक्तिमान भगवान के नाम पर दिलाई जाती है। मतलब अब शपथ का स्वरूम बदल गया है। हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई सभी धर्म में किताबों का शपथ अब बंद हो गया है। अब शपथ के रूम में कहा जाता है की मै ईस्वर के नाम पर कसम खाता हूँ, ईमानदारी से पुष्टि करता हूँ की जो कुछ भी कहूँगा वो सत्य कहूँगा-सम्पूर्ण सत्य और सत्य के अलावा कुछ भी नहीं कहूँगा।

यहाँ आपको ये भी जानना चाहिए की ओथ एक्ट 1969 में यह भी प्रावधान है की 12 साल से कम उम्र का कोई गवाह है तो उसे किसी प्रकार की शपथ नहीं लेनी होती है क्योकि ऐसा माना जाता है की बच्चे भगवान का रूप होते हैं। आपको ये भी जानना चाहिए की जो ब्यक्ति अपराधी है तो अपराधी को भी शपथ नहीं दिलाई जाती है क्योकि भारतीय संविधान के आर्टिकल 20 में एक प्रावधान है की कोई भी ब्यक्ति अपने विरुध गवाह बनने के लिये बिबश नहीं किया जायेगा।

एक चीज़ और आप जान लें की शपथ लेने के बाद भी ब्यक्ति अगर झूठ बोले तो आपको ये पता होना चाहिये की झूठ बोलना ही अपने आप में एक अपराध है। इसमें अपराधी को आईपीसी की धारा 193 के तहत 7 साल की सजा हो सकती है।

 

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