आत्मरक्षा का कानून क्या है | आत्मरक्षा में हम क्या क्या कर सकते हैं

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हमारा कानून हमें अपनी प्रोपर्टी एयर आत्मरक्षा करने का पूरा अधिकार देता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 96 से लेकर अनुच्छेद 106 तक आत्मरक्षा का जिक्र किया गया है। अगर आपसे कोई आपको और आपकी प्रोपर्टी को नुकसान पहुंचाता है या नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है तो आप उससे लड़ सकते है और यहाँ तक कि आप उसको जान से भी मार सकते हैं और ये मर्डर नहीं कहलायेगा बल्कि ये आत्मरक्षा की श्रेणी में आयेगा। आत्मरक्षा में किसी को जान से मारना मर्डर नहीं कहलाता है।

 

लेकिन इसके कुछ नियम होते हैं।

 

इसमें आपको ये जानना बहुत जरूरी है कि आप सामने वाले शख्स को उतना ही चोट पहुँचा सकते है जितना कि वो आपको पहुंचाना चाहता हो।

जैसे कि अगर कोई रात के समय आपके घर में चोरी की नीयत से घुस आया है और चोर के पर बंदूक नहीं है तो आप उस पर गोली से वॉर नहीं कर सकते हैं, आप उसपर लाठी या डंडे से भी वॉर सकते हैं। लेकिन अगर उसके पास बंदूक है यानी कि वह आपको जान से भी मार सकता है तो आप आत्मरक्षा के लिये उसको जान से मार सकते है।

 

अगर कोई आपके ऊपर लाठी से हमला करता है तो आप उसे डायरेक्ट गोली नहीं मार सकते हैं। आप भी उसपर लाठी से ही हमला कर सकते हैं। अगर किसी के पास बंदूक है तो वह आपको जान से भी मार सकता है तो आप भी उसपर बंदूक से हमला कर सकते हैं।

ये ध्यान देने वाली बात है कि आप सामने वाले को उतनी ही चोट पहुंचा सकते हैं जितनी वो आपको पहुंचा सकता है।

किन परिस्थितियों में किसी को जान से मारना क्राइम नहीं है

 

1. यदि कोई शख्स आपके घर में लूट करता है या सेंध लगाता है या चोरी की नीयत से आपके घर में घुसता है और उस शख्स से आपको जान का खतरा है तो आप उस शख्स को जान से मार सकते हैं। ये मर्डर नहीं आत्मरक्षा कहलायेगा।

 

2. यदि किसी लड़की या महिला को लगता है कि कोई उस पर हमला करने वाला है या रेप करने वाला है तो वह आत्मरक्षा के लिये उस शख्स को जान से मार सकती है। ये भी आत्मरक्षा की श्रेणी में आयेगा।

 

3. यदि किसी महिला या लड़की से रेप के दौरान वह रेप करने वाले शख्स को घायल कर देती है और उस शख्स की मौत हो जाती है तो हमारा कानून इसको भी मर्डर नहीं मानता है बल्कि ये आत्मरक्षा कहलायेगा।

 

4. अगर किसी व्यक्ति का अपहरण हो जाये और अपहरण के दौरान अपहरणकर्ता से वह आत्मरक्षा के लिये लड़ता है और उस परिस्थिति में अपहरणकर्ता की मौत हो जाती है तो ये भी आत्मरक्षा कहलाता है।

 

5. अगर किसी महिला या लड़की पर कोई एसिड अटैक करता है तो कोई दूसरा व्यक्ति उस महिला के बचाव में उस हमलावर पर हमला करता है और उस हमलावर को जान से मार देता है तो कोर्ट इसको भी हत्या नहीं मानता है, ये भी आत्मरक्षा में आता है।

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